Friday, May 29, 2026

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत् ।।

सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति का एक अत्यंत प्रसिद्ध और प्रेरणादायक प्रार्थना मंत्र है जो 'बृहदारण्यक उपनिषद' से लिया गया है : सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत् ।। (सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें, और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े ।) यह मंत्र "वसुधैव कुटुम्बकम्" (पूरी पृथ्वी एक परिवार है) की भावना को चरितार्थ करता सनातन संस्कृति का एक अत्यंत पवित्र शांति मंत्र है, जो योग दर्शन के मूल उद्देश्य यानी वैश्विक कल्याण और मानसिक शांति से गहरा संबंध रखता है और बिना किसी भेदभाव के पूरी मानवता के लिए शांति, सद्भाव और लोकक्षेम (कल्याण) की प्रार्थना करता है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह मन, शरीर और आत्मा को एक सूत्र में पिरोने का विज्ञान है। योग अभ्यास के अंत में इस शांति मंत्र का पाठ करने के पीछे निम्नलिखित महत्वपूर्ण कारण हैं । लोक कल्याण की भावना (Universal Well-being) : योग हमें 'मैं' और 'मेरा' के अहंकार से ऊपर उठाकर 'हम' की भावना से जोड़ता है। यह मंत्र हमें सिखाता है कि हमारी व्यक्तिगत खुशी पूरी दुनिया की खुशी में निहित है। सहानुभूति और करुणा (Compassion) : जब हम ध्यान और प्राणायाम करते हैं, तो हमारा हृदय दूसरों के प्रति संवेदनशील बनता है। यह प्रार्थना हमारे भीतर सभी प्राणियों के लिए दया भाव जगाती है। मानसिक शांति (Mental Peace) : इस मंत्र के उच्चारण से मन में सकारात्मक तरंगें उत्पन्न होती हैं, जिससे तनाव कम होता है और मानसिक संतुलन प्राप्त होता है। स्वस्थ समाज का निर्माण: योग के 'यम' और 'नियम' (जैसे अहिंसा और अस्तेय) इस मंत्र के 'निरामयाः' (स्वास्थ्य) और 'सुखिनः' (सुख) के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करते हैं। "सर्वे भवन्तु सुखिनः" मंत्र केवल पूजा-पाठ या इतिहास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे दैनिक जीवन में अपनाने से मानसिक तनाव कम होता है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। आधुनिक मनोविज्ञान भी यह मानता है कि दूसरों के प्रति अच्छी भावना रखने से हमारा अपना मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है। आप इस मंत्र का अपने दैनिक जीवन में निम्नलिखित व्यावहारिक तरीकों से प्रयोग कर सकते हैं: 1. सुबह की शुरुआत (Morning Affirmation) : सुबह सोकर उठते ही बिस्तर पर बैठकर गहरी सांस लें और तीन बार शांत मन से इस मंत्र का उच्चारण करें जिससे यह आपके अवचेतन मन (Subconscious mind) को पूरे दिन के लिए सकारात्मकता और शांत ऊर्जा से भर देता है। 2. भोजन से पहले कृतज्ञता (Food Prayer) : दोपहर या रात का भोजन करने से पहले, भोजन को प्रणाम करके इस मंत्र को दोहराएं। यह मंत्र अन्न देने वाले किसानों और भोजन बनाने वाले के प्रति कृतज्ञता (Gratitude) व्यक्त करता है। इससे भोजन का पाचन बेहतर होता है और मन शांत रहता है। 3. योग और ध्यान के अंत में (Closing Mantra) : यदि आप प्रतिदिन व्यायाम, योग या ध्यान (Meditation) करते हैं, तो सत्र के अंत में 'शवासन' या 'पद्मासन' में बैठकर इसका पाठ करें, यह योग से उत्पन्न हुई ऊर्जा को ब्रह्मांड के कल्याण के लिए समर्पित करने का सबसे उत्तम तरीका है। 4. तनाव या गुस्से के समय (Anger Management) : जब भी किसी सहकर्मी, मित्र या परिवार के सदस्य पर गुस्सा आए, तो प्रतिक्रिया देने से पहले मन ही मन 'मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्' (किसी को दुःख न मिले) सोचें। यह आपके भीतर की नकारात्मकता को तुरंत शांत करता है और आपको गलत निर्णय लेने से बचाता है। 5. उत्तम स्वास्थ्य के लिए : रुग्णावस्था के कारण दवा लेते समय शांत चित्त होकर भगवान् धन्वन्तरी से ली जा रही दवा से शीघ्र आरोग्य प्राप्ति के लिए सविनय आग्रह करते हुवे चिकित्सक के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करें । 6. रात को सोते समय (Bedtime Ritual) : सोने से ठीक पहले, अपनी आँखें बंद करें और पूरे संसार के स्वस्थ और सुखी होने की कामना करते हुए इस मंत्र का जाप करें। इससे दिनभर की चिंताएं दूर होती हैं, अनिद्रा (Insomnia) की समस्या से राहत मिलती है और गहरी व सुकून भरी नींद आती है।

Wednesday, May 6, 2026

चाय की चाहत..अपनी.. अपनी..

हम छोटे थे तबकी बात है । मेरे अनुज ने आज तक कभी चाय नहीं पी तब भी नहीं पीता था । पर जब चाय का समय होता तो माताराम अनुज का स्कूल से आने का इंतजार करती ओर उसके आने के बाद पास बिठाकर खुद चाय पीती । उनका कहना था कि इसके बिना चाय उग-ती नहीं । अब भला चाय का क्या उग-ना । तब समझ नहीं आया । बड़े हुवे तब समझ आया जब हमें भी चाय का शौक लगा। दरअसल अकेले चाय पीने का मन नहीं करता जब साथ होता है तभी चाय पीने का मज़ा आता है। इसीलिए कहा भी जाता है की चाय तो एक बहाना है, बस समय साथ बिताना है । बैठक बाजी चाय से ही जमती है । सुबह सुबह अखबार पढ़ने का आनंद भी चाय की चुस्कियों के साथ ही आता है देश दुनियां की खबरों के साथ अकेलापन जो नहीं होता । जगराता हो या ब्याह शादी का माहौल चाय सब भागदौड़ की थकावट भगाने का देशी नुस्खा है। आजकल तो जाना नहीं होता पर पहले जब जागरण में जाते थे, शौक था भजन सुनने का तो हमारे एक परिचित भजन गायक जब "चाय तूं चोखी चाली रे छोटा मोटा सगलां झाली रे' की तान लगाते इसका मतलब साफ था....अब चाय चाहिए । चाय बनाना भी एक कला है । वही पानी, वही दूध, वही चाय पत्ती, वही अदरक या इलायची पर सब के हाथ की बनी चाय का जायका अलग ही होता है । बुजुर्वा महिलाओं को शायद यह अच्छा न लगे पर मेरा अनुभव है कि आमतौर पर बच्चियां चाय अधिक बढ़िया बनाती है शायद ईश्वरीय कृपा । आपको शायद अटपटा लगे पर चाय के स्वाद का संबंध स्थान विशेष से भी होता है । नॉर्थ ईस्ट में प्रचलित काली चाय वहीं ज्यादा स्वादिष्ट लगती है। हरियाणा में अच्छी चाय मतलब खड़ा चम्मच चाय । यानि अधिक दूध और उससे कहीं ज्यादा चीनी । सीधी सी बात है अधिक शारीरिक मेहनत के कारण अधिक चीनी की जरूरत जिससे शरीर को ज्यादा एनर्जी मिल सके । यही कारण है कामगार लोग अपेक्षाकृत अधिक मीठी चाय ही पसंद करते हैं। युवा पीढ़ी की बैठक बाजी, या व्यावसायिक चर्चा के लिए बड़े शहरों में आजकल टिन टप्पर वाली चाय की दुकानें "टपरी" या एयरकंडीशंड लाज़वाब साजसज्जा वाली स्टारर दुकानें बड़े ब्रांड नाम "MBA चाय वाला" भी मशहूर हो रही है । केशर चाय का अपना रुतबा है तो कुल्हड़ वाली चाय भी कम नहीं है जनाब ! कुल्हड़ वाली चाय में मिट्टी की प्यारी सी सौंधी सुगंध सीधे दिल को सुकून देती है । रेल का सफर कर रहे हों, सफर लंबा हो तो ओर किसी चीज की तलब हो या ना हो चाय की तलब जरूर हो जाती है । आमतौर पर ट्रेन में या रेलवे स्टेशन पर चाय अच्छी नहीं मिलती परन्तु रतनगढ़ रेलवे स्टेशन पर ट्रेन रुकते ही मुसाफिर स्टेशन के बाहर दौड़ते थे, तब आधा घंटे का ठहराव होता था ओर चाय भी लाजवाब । सोचिए किसी रेलवे स्टेशन की पहचान ही चाय से हो ? आप सफर कर रहे हों रात के 12 बजे हों या सुबह के 4 बजे हों जब "चाय-चाय" की आवाजें सब मुसाफिरों को जगा दें तो समझ लीजिए आप फुलेरा जंक्शन पर है। चाय की चाहत भी अपनी अपनी है । किसी को कम तो किसी को ज्यादा । "कटिंग", "फुल" या "डबल डोज" वह भी समय ओर जरूरत के हिसाब से । सच मानिए हमारा चाय से अटूट रिश्ता बन गया है । बिस्किट बिना चाय नहीं चलते तो बरसात में पकौड़े बिना चाय जमते ही कहां है। पढ़ाई करते समय, भक्ति करते समय, काम करते समय चाय तो जरूरी हो ही गई है। घर पर कोई आए तो स्वागत सत्कार चाय से ओर कहीं कोई जाए बाईदवे बिना चाय के बैरंग लौट आए तो...कैसे लोग हैं चाय के लिए ही नहीं पूछा ? बेटी चाय ले आओ....मतलब अब आ जाओ लड़के वाले इंतज़ार कर रहे हैं । खुशी का माहौल हो या गमी का चाय का साथ तो चाहिए ही शायद इसीलिए - जगत में चाय बड़ी बलवान सुबह चाय और शाम चाय तो चाय का करूं बखान जगत में चाय बड़ी बलवान। -रामकृष्ण सेवदा, बीकानेर